Editorial :- पूूरे पागल दुश्मन पाक  से तो निपट लेेंगे पर आधे पागल जयचंदों  से कैसे निपटे?

Editorial :- पूूरे पागल दुश्मन पाक से तो निपट लेेंगे पर आधे पागल जयचंदों से कैसे निपटे?

March 7, 2019 0 By Rajesh Agrawal

पीएम मोदी ने कल मध्यप्रदेश के धार में कहा था कि पाकिस्तान अभी भी नहीं सुधरा तो उन्हें बता दिया गया है कि हम क्या करेंगे?  

इस चेतावनी के बाद पाकिस्तान डर के मारे दिखाने के लिये ही सही पर मसूद अजहर के भाई समेत ४४ आतंकियों को हिरासत में लिया है। तथा पाकिस्तान स्थित सभी प्रतिबंधित संगठनों की संपत्ति भी जप्त करने का आदेश दिया है। घबराए पाकिस्तान ने एलओसी पर हलचल बढ़ाई है, अतिरिक्त सैन्य टैंको की तैनाती भी की है।  

सर्जिकल स्ट्राईक और एयर स्ट्राईक करके हमने बता दिया है और हमारी इस आतंकविरोधी मुहिम में पूरे विश्व के देशों का साथ मिल रहा है। इस्लामिक या मुस्लिम बाहुल्य देशों से भी हमें समर्थन मिल रहा है। पाकिस्तान से तो हम निपट लेंगे अर्थात पूरे पागल को तो जैसे जेल में डाल दिया जाता है वैसे ही हम आतंकिस्तान को अपनी  गिरफ्त में ले लेंगे।

समस्या तो यह है कि आधे पागलों का क्या किया जा सकता है? इसी प्रकार से ओसामा जी, हाफिज साहब, अफजल गुरू जी कहने वालों और  सर्जिकल स्ट्राईक जैसे ही एयर स्ट्राईक पर सबूत मांगने वाले जयचंदों का क्या किया जाये?  आधे पागलों को जेल में तो डाला नहीं जा सकता। हां आगरा के पागल खाने में या सुधार ग्रह में भेजा जा सकता है।

ओसामा को ‘जीÓ और हाफिज को ‘साहबÓ क्यों कहते हैं दिग्विजय?

अब सवाल उठता है कि क्या दिग्विजय सिंह को ‘दुर्घटनाÓ और ‘आतंकी घटनाÓ का शाब्दिक अर्थ नहीं मालूम या फिर उनसे कोई चूक हुई है। या उनके ट्वीटर अकाउंट को हैंडल करने वाली टीम से यह गलती हुई है। हालांकि, इस बीच दिग्विजय पुलवामा आतंकी हमले को ‘दुर्घटनाÓ बताने वाले अपने बयान पर कायम हैं और उनका कहना है कि किसी की हिम्मत है तो उन पर केस करे। कांग्रेस इस मामले को जबरन तूल देने का आरोप लगा रही है। जबकि भाजपा के कई बड़े नेताओं से लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे लेकर दिग्विजय पर हमलावर हो चुके हैं। ऐसा कतई नहीं है कि इस मामले में सिर्फ दिग्विजय सिंह की ही जुबान फिसली है, भारतीय जनता पार्टी के नेता और यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी पुलवामा हमले को बड़ी ‘दुर्घटनाÓ बता चुके हैं।

जनरल विके सिंह ने स्पष्ट कर दिया है किसे दुर्घटना कहते हैं और किसे आतंकवादी घटना।

यदि पुलवामा में जेईएम के आत्मघाती दस्ते द्वारा हमारी सेना के ४० जवानों की शहादत हुई  यदि यह दिग्विजय सिंह जैसा कह रहे हैं वैसे दुर्घटना थी तो राजीव गांधी की हत्या भी क्या दुर्घटना थी आतंकवादी घटना नहीं।

>> एयर स्ट्राईक के तुरंत बाद टीवी चैनल्स में यह बताया जा रहा था कि अजहर मसूद का भाई और अन्य कौन-कौन मरे, कितने मरे आदि।

इसके अलावा यह भी टीवी चैनल में बताया जा रहा था कि पाकिस्तान वहॉ से सभी सबूतों को खून को मिटाने का प्रयास कर रहा है। लाशें भी गायब कर रहा है जिससे कि फॉरेन के मीडिया को बुलाकर दिखाया जा सके कि यहॉ बालाकोट में कोई भी आतंकी गतिविधियां नहीं होती हैं।

एयर स्ट्राईक  के तुरंत बाद पाकिस्तान की संसद तक में इमरान खान के प्रति शेम शेम के नारे सांसद लगा रहे थे। वे कह रहे थे कि मोदी से बढ़़कर कोई भी हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री पाकिस्तान का दुश्मन नहीं रहा है।

भारत में कांग्रेस तथा अन्य वंशवादी पार्टी के नेताओं को क्या हो गया है पता नहीं कोई सबूत मांग रहा है तो कोई लाशों की संख्या पूछता है। उनके  प्रोपोगेंडा करने वाले टीवी चैनल्स के द्वारा कहलवाया जा रहा है कि अमित शाह ने २५० की संख्या कैसे बताई?  उसके बाद से ही विपक्ष लाशों की संख्या पूछ रहा है।

>> अरे भई! अमित शाह २५० बता रहे हैं तो वंशवादी विपक्षी पार्टियां कोई नहीं मरा, एक मरा दो मरा यह कह सकते हैं यह कहने के लिये उन्हें कौन रोकता है। जनता अपने आप समझ जायेगी कि कौन हिन्दुस्तान में ही छोटे -छोटे पाकिस्तान  पाल रहा है। यहॉ यह उल्लेखनीय है कि पश्चिमी बंगाल के टीएमसी के एक सांसद ने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर एक स्थान विशेष ल ेजाकर कहा था कि देखो यह हमारे यहॉ का मिनी पाकिस्तान है

सर्जिकल स्ट्राईक के बाद अमित शाह और भाजपा के नेता मिठाई खाये वितरित किये इस पर भी उन्हें आपत्ति हुई। आपत्ति करने वालों को कौन रोक रहा था मिठाई खाने और जश्र मनाने के लिये वो क्यों मुंह लटकाये रहते हैं।

श्रीनगर लोकसभा सीट के चुनाव के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा चुनाव कार्य में तैनात अद्धसैनिक बलों के साथ दुव्र्यवहार और उन पर पथराव के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था .जिसमें मेजर गोगोई को चुनाव में तैनात सुरक्षा बलों की रक्षा के लिए एक स्थानीय नौजवान को जीप पर बांधकर ले जाते हुए दिखाया गया था. इस कारण से पत्थरबाज जीप में बंधे अपने साथी पर पत्थर नहीं फेंस सके थे।

अतएव इसी प्रकार से यदि अगली बार एयरस्ट्राईक होने के समय सुखोई या मिराज-२१ में उन लोगों को बैठाकर पाकिस्तान ले जाया जाये जिससे कि वे वहॉ मरने वाले आतंकियों के शवों की गिनती कर सकें।