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सुपर स्टार रजनी कांत के कल्याणसुंदरम बनाम विधि सम्मत डकैत डी एल ऍफ़ वाड्रा

सुपर स्टार रजनी कांत के कल्याणसुंदरम बनाम विधि सम्मत डकैत डी एल ऍफ़ वाड्रा

क्या वाड्रा द्वारा कानून की आँखों में धूल झोंक कर किसानों की जमीन को धोखा दे कर कौडियों की कीमत में खरीद कर दस बीस सौ गुना कीमत में बेचना अफसोसनाक और बेहद शर्मनाक तथा भारत के प्रजातान्त्रिक रूप पर काली श्याही फेंकना नहीं है?

जादूगर मैजिशियंस अपनी जादूगिरी दिखाते समय पॉकेटमारी के कौशल का परिचय देते हैं। मनोरंजन स्वरुप वे जादूगर पॉकेट मरते हैं और फिर लौटा देते हैं। क्या डी एल ऍफ़ चेयरमैन सिंह और सोनिया जी के दामाद श्री अर्थात राहुल बाबा के बहनोई  रोबर्ट वाड्रा इसी प्रकार के गरीब किसान हैं जो  डाकू खडग सिंह जैसे साधु के वेश में घोड़े को चुराया था परन्तु बाद में पश्चाताप कर घोड़े को बाबा भर्ती को वापिस कर दिए थे?  क्या वाड्रा रॉबिनहुड हैं जो डकैती के धन को गरीबों में ितरित कर देंगे ? क्या सुपर स्टार रजनीकांत द्वारा अडॉप्टेड अपनाये गए पिता तुल्य सुंदरम जिन्होंने अपनी सम्पूर्ण ३० वर्षों का वेतन और अमेरिकल गवर्नमेंट से अवार्ड में मिले ३० करोड़ का वितरण जरूरतमंद गरिबोने में किया था का अनुकरण करने वाले हैं? 

घबराइये नहीं, डी एल ऍफ़ वाड्रा किसानों की जमीन हड़प कर इकठ्ठा की हुई अपार धन राशि को न ही विदेश ले जा रहे हैं और न ही स्विस बैंक में जमा करने जाने वाले हैं। वे जालसाजी से इकठ्ठा की गई इस धन दौलत को हिंदुस्तान की जनता को ही उसी प्रकार लौटा देंगे जिस प्रकार अविवाहित कल्याणसुंदरम ने अपनी ३० वर्षों में जमा की गई धन राशि को गरीबों में बाँट दिया और तदुपरांत सुपर स्टार रजनी कांत ने उन्हें पिता के रूप में अपना कर अपने साथ रख लिया। 

घबराइये नहीं, यद्यपि वाड्रा की माताश्री स्कॉटिश ओरिजिन हैं ,कांग्रेस के माईबाप गांधी अभी भी इतालियन नागरिकता रखे हुए हैं और बेधड़क बिना सम्बंधित सरकार को सूचित किये विदेश प्रवेश गुपचुप करते हैं। अब वी वी आई पी वाड्रा गुप्त रूप से विदेश जाते हैं और दुबई में आलिशान बांग्ला भी खरीद चुके हैं। ये ही तो हैं जो स्वयं और इनके बाप दादा स्वतंत्रता के बाद से जनसेवक का ड्रामा करते आ रहे हैं।

अविवाहित कल्याणसुंदरम  ३० वर्षों तक लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत रहे। वह अपनी तनख्वाह को गरीबों को दान कर दिए।  वह होटल में पार्ट टाइम कार्य कर अपनी दैनिक आवश्यकता की पूर्ति करते। इतना ही नहीं अपनी पेंशन के दस लाख रूपये भी दान कर दिए। वे विश्व में प्रथम व्यक्ति हैं जिन्होंने सामजिक कार्य हेतु अपनी सम्पूर्ण आय को दान किये। अमेरिकन गवर्नमेंट ने उनके इस परोपकार के लिए उन्हें 'मन ऑफ़ थे मिलेनियम ' एवार्ड प्रदान कर ३० करोड़ की धन राशि भी उपलब्ध कराइ।  इस धन राशि को भी कल्याणसुंदरम  ने हमेशा की तरह जरूरतमंद गरीबों में वितरित कर दी।

असाधारण परोपकारी व्यक्तित्व के धनि अविवाहित कल्याणसुंदरम को सुपर स्टार रजनीकांत ने अपने पिता के समान मानते हुए अपने साथ हमेशा के लिए रख लिया।

क्या आप सुपर स्टार रजनीकांत के पिता तुल्य बन चुके असाधारण व्यतित्व के धनि  त्यागी अविवाहित कल्याणसुंदरम की तुलना धोनी नकली गांधी परिवार से कर सकते हैं? 


"डी एल ऍफ़ -वाड्रा भ्रस्ट तंत्र " हिंदी में लिखी मेरी अक्टूबर ०१, २०१४ को प्रकाशित होने वाली पुस्तक में डी एल ऍफ़ के चेयरमैन के पी सिंह  और राजीव गांधी की मित्रता से लेकर डी एल ऍफ़ -वाड्रा घोटाले तक के विाराणत्मक तथ्य हैं। भ्रस्ट लेन देन को बही खातों में विधि सम्मत पारदर्शी बनाने की कला की चर्चा है। के पी सिंह और रोबर्ट वाड्रा राजनीतिक सरन्छन् में लखपति से अरबपति कैसे बने यही इस पुस्तक की विषय वस्तु है। यह आर्टिकल उसी पुस्तक का अंश है। Email: premendraagrawal@gmail.com

बाबा भारती और डाकू खडग सिंह बनाम अरबपति गरीब किसान वाड्रा



डीएलएफ-वाड्रा-हुड्डा वित्तीय घोटालों के अभिनव तरीकों के रचनाकार हैं। इन घोटालों के अभिनव तरीकों का अनुकरण मां और बेटे सोनिया गांधी राहुल द्वारा नेशनल हेराल्ड से संबंधित घोटाले में किया गया है। Gardai लेखक चेतावनी देते हुए बताते हैं कि रोमा जिप्सी डबलिन की सड़कों पर डकैती करते प्रायः पाये जाते हैं। ये चोर गिरोह बना कर चोरियां करते हैं। बटुआ पॉकेट से निकलने के पूर्व ये चोर पहले लापरवाह राहगीर को डांस करने को पूछते हैं और ऐसा करने पर चोर का दूसरा साथी बटुआ निकल कर रफू चक्कर हो जाता है।

मेरी पुस्तक का यह अध्याय डी एल ऍफ़ - वाड्रा के उन घोटालों से विशेषकर सम्बंधित है जिन घोटालों का पर्दा फास आई एस अधिकारी अशोक खेमका द्वारा किया जा चूका है। जेब काटना पिक पॉकेटिंग चोरी का वह तरीका है जिसमें जिसकी जेब कटी है उसे उस समय इसकी भनक तक नहीं लगती है। जेब काटने  पिक पॉकेटिंग चोरी में भी विशेष प्रकार के कौशल जैसे जिसकी पॉकेट मारनी हो उसका ध्यान दूसरी तरफ मोड़ना, द्रुत गति से हाथ सफाई करना व् फिर तेज गति से रफू चक्कर हो जाना इत्यादि।

राजनितिक नेताओं ने विशेष कर यूपीए सरकार के नेताओं ने अपनी पहचान खतरनाक लोकतांत्रिक जेबकतरों के रूप में बना चुके हैं. इस श्रेणी में डी एल ऍफ़ - वाड्रा के पारदर्शी घोटाले प्रमुखता से आते हैं। डी एल ऍफ़वाड्रा कुक्ड अकाउंट काले को सफ़ेद और नंबर दो के लें दें को नंबर एक बनाने की कला में माहिर हैं।

ये घोटाले कांग्रेस शाषित प्रदेशों में विशेषकर  हरियाणा और राजस्थान के किसानों की भूमि को हड़पने में हुआ है। संसद में मिर्ची स्प्रे: अफसोसनाक और बेहद शर्मनाक था। तेलंगाना बिल का विरोध कर रहे सांसदों में से एक सांसद राजगोपाल ने नेताओं पर मिर्ची स्प्रे कर दिया. इसके बाद तो संसद में हंगामा मच गया. पूरी दुनिया तक ये खबर पहुंची और भारतीय संसद को शर्मसार होना पड़ा.    

क्या कानून की आँखों में धूल झोंक कर किसानों की जमीन को धोखा दे कर कौडियों की कीमत में खरीद कर दस बीस सौ गुना कीमत में बेचना अफसोसनाक और बेहद शर्मनाक तथा भारत के प्रजातान्त्रिक रूप पर काली श्याही  फेंकना नहीं है ?

जादूगर मैजिशियंस अपनी जादूगिरी दिखाते समय पॉकेटमारी के कौशल का परिचय देते हैं। मनोरंजन स्वरुप वे जादूगर पॉकेट मरते हैं और फिर लौटा देते हैं। क्या डी एल ऍफ़ चेयरमैन सिंह और सोनिया जी के  दामाद श्री अर्थात राहुल बाबा के बहनोई  रोबर्ट वाड्रा इसी प्रकार के मेगिशन हैं जो रॉबिनहुड और डाकू खडग सिंह या सुपर स्टार रजनीकांत द्वारा अडॉप्टेड अपनाये गए पिता तुल्य सुंदरम रहे हैं?

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हार की जीत में  बाबा भारती और डाकू खडग सिंह बनाम डी एल ऍफ़ -वाड्रा घोटालेबाज

........बहुत समय पहिले की बात है  बाबा भारती नाम के एक संत किसी  गाँव मे रहते थे वे गाँव के सभी लोगों से बड़ा प्रेम रखते थे एवं उनकी हमेशा सहायता करने मे तत्पर रहते थे गाँव वासी भी उन्हे बहुत चाहते थे बाबा भारती के पास एक घोडा था जिसे उन्होने जब वह बच्चा था तब से पाला था बड़ा होने पर वह घोडा बहुत फुरतीला एवं अच्छी कद काठी वाला हो गया बाबा भारती को उससे अत्यधिक लगाव था और वो एक पल के लिए भी उसे नहीं छोडते थे घोड़े और उससे बाबा भारती के लगाव की कथा शीघ्र ही दूर दूर तक फेल गयी और लोग इसे प्रत्यक्ष देखने के लिए आते रहते थे उनमे से कुछ लोग बाबा से घोड़े को बेचने का प्रस्ताव भी रख देते थे परंतु बाबा को यह नामंज़ूर था वो साफ मना कर देते थे धीरे धीरे ये बात प्रख्यात डाकू खड़ग सिंह को पता लगी वह भी घोडा देखने बाबा की कुटिया पे पहुँच गया घोडा अत्यधिक पसंद आने पे उसने बाबा को अपना असली परिचय देते हुए उसे खरीदने की पेशकश बाबा के सन्मुख की , परंतु बाबा किसी भी तरह तैयार नहीं हुए खड़ग सिंह को ये बात अच्छी नहीं लगी और उसने बाबा को कहा बाबा जी आपको घोड़े का क्या काम एवं अब यह घोडा आप के पास ज्यादा दिन नहीं रह पाएगा बाबा कुछ बोले परंतु उस दिन के बाद से बहुत सतर्क हो गए रात मे कई कई बार उठ- उठ  कर घोड़े को देखते थे एवं तसल्ली करते रहते थे

      ........ देखते देखते कई दिन बीत गए और कुछ हुआ सजग होते हुए भी बाबा को लगा शायद खड़ग सिंह ने अपना इरादा बदल लिया है एक दिन रोजाना की भाँति वो अपने घोड़े के साथ सैर कर वापस रहे थे कि अचानक रास्ते मे किसी व्यक्ति ने उन्हें आवाज लगाई कि वह बहुत बीमार है तथा उसे अगले गाँव तक जाना है बाबा उसे देख कर द्रवित हो गए एवं उसे घोड़े पे बैठाल लिया कुछ दूर जाने के बाद अचानक बाबा को एक झटका लगा और वह बीमार व्यक्ति घोड़े की लगाम अपने हाथ मे लेकर तन के बैठ गया उसने बाबा को बोला , याद आया मैंने कहा था कि ये घोडा आपके पास ज्यादा दिन नहीं रहेगा मैं डाकू खड़ग सिंह हूँ और ये घोडा ले जा रहा हूँ बाबा को तो जैसे साँप ही सूंघ गया खड़ग सिंह घोडा लेके आगे बड़ा ही था कि पीछे से बाबा ने उसे आवाज़ लगाई बाबा की आवाज़ सुनकर खड़ग सिंह पलटा और बोला की बाबा अब ये घोडा तो आपको नहीं मिलेगा , इसके अलावा जो कहना है वो कहो।

 

      ........इस पर बाबा भारती ने डाकू खड़ग सिंह से केवल इतना सा कहा कि इस घटना का जिक्र किसी से करना और वापिस मुड़ कर इस तरह चल दिये जैसे कि वो प्यारा घोडा कभी उनका था ही नहीं खड़ग सिंह से रहा गया और उसने पूछा बाबा इसका क्या मतलब हुआ बाबा ने अभिप्राय समझाते हुये कहा कि यदि लोगों को सच्ची घटना का पता लग गया तो उनका अच्छाई पर से विश्वास उठ जाएगा एवं कोई दीन दुखियों की मदद नहीं करेगा खड़ग सिंह गहरी सोच मे पड़ गया , उसने सोचा भी था कि अभी अभी पायी जीत की खुशी इतनी जल्दी धूमिल होने वाली है खड़ग सिंह के अंदर जैसे कुछ पिघल रहा था उसकी कठोरता उसकी इस अकस्मात हार के आगे बेबस हो चली थी

      ..........रात्री के चौथे प्रहर मे रोज़ की भांति बाबा भारती नित्य करमों से निव्रत्त होकर आदतन अस्तबल मे पहुँचे , परंतु फिर जैसे उन्हें याद आया तो वो मायूस होकर वापिस लौटने लगे कि तभी घोड़े ने मालिक के कदमो की आहट पहचानकर ज़ोर से हिनहिनाया आश्चर्य एवं प्रसन्नता से बाबा भारती तुरंत घूमे और घोड़े से लिपटकर रोने लगे उनकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे उधर डाकू खड़ग सिंह भी ओट मे खड़ा चुपचाप इस अद्भुत मिलन को देखकर आँसू बहा रहा था जीता हुआ घोडा लौटाकर भी वो बहुत खुश था जीत की इस हार मे एक ऐसी अनजानी जीत थी जिसका संबंध सीधे मन से था , भावनाओं से था बाबा भारती भी हार की इस जीत से विस्मयपूर्ण प्रसन्नता मे थे

      ...........सच मे अब हार जीत का कोई अर्थ नहीं था कोई जीतकर भी हारा था और कोई हारकर भी जीता था , मगर दुखी कोई भी नहीं था सच्चे अर्थों मे ये तो मानवता की जीत थी ,जिसने एक बर्बर डाकू को भी सोचने और अच्छाई की तरफ लौटने को विवश कर दिया था।

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